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बिहार चुनाव एक्जिट पोल

भारतीय लोकतंत्र की विशेषता यह है कि वह स्व के सुलभ और संस्कारित वर्ग को लोकतंत्र का प्रारूप जाना जाता है। बिहार चुनाव के परिणाम इस बात का इशारा खुल कर कर रहें हैं। बिहार का चुनाव बहुदलीय से दो दलों का चुनाव बन गया था। पूरा चुनाव भविष्य और वर्तमान की बजाय मै और भूत कि गलतियों के विमर्श का केंद्र बन गया।

यह मै में धर्म की बात की गई, राष्ट्रीयता का छौंका लगाया गया। नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी जी के सर्व भौमिक व्यक्तित्व को प्रचारित किया गया, इस प्रयास में वो भूल गए की जिस झांकी को दिखाने की कोशिश की जा रही थी वह राजनीतिक कार्य शैली का महत्वूर्ण अंग हो सकता है लेकिन वहां पर इनकी नीति निर्धारण वाले यह भूल गए कि यह झांकी दस साल पुरानी हो चुकी है। लोग चेहरा देखने के बजाय आस पास देख रहें हैं। सभी लोग झांकी को पुराना होते देख रहे हैं, आस पास किए गए जुगाड को देख रहे है। झांकी बनाने के चक्कर में मोदी और नीतीश जी के प्रोडक्ट को स्थापित करने लगे। यह एन डी ए की सबसे पहली नादानी थी।

भूत किसी भी व्यक्ति को दो तरीके से प्रभावित करता है पहला एक अनुभव और दूसरा विरोधी को आलोचना का मौका देता है। बिहार चुनाव इस बात को एक उपयुक्त उदाहरण है और भविष्य में भी होगा कि तेजस्वी भूत की गलतियों से अनुभव ले रहे थे तो नीतीश जी भूत की गलतियों को आधार बनाकर केवल आलोचना कर रहे थे। एन डी ए राजद और लालू की गलतियों को याद दिलाकर अपने आपको विजेता घोषित कर रहे थे, वो भूल गए की गलतियों की गंभीरता हर व्यक्ति के लिए अलग अलग होती है। गलतियों से व्यक्ति अपने आपको संवारते हुए भविष्य में उन गलतियों से बचना भी सीख जाता है। लालू के राज को एक नाम देने कि कोशिश हरदम की गई और अनियंत्रित शासन और प्रशासन को जंगलराज के नाम से प्रचारित किया गया और सफल हुए। इस प्रचार में फिर राजनीतिक हमलों की नीति निर्धारित करने वाले राजनेता भूल गए कि लालू एक राजनेता की भूमका में व्यक्तिगत रूप से हरदम सफल रहे हैं और अपनी गलतियों से सुधार कर सकते हैं। तेजस्वी ने अपनी पार्टी की राजनीतिक और नेताओं कि गलतियों को सुधार कर राजनीति करने के लिऐ पुरी तरह उप मुख्यमंत्री की कुर्सी जाने के बाद से ही आ गए थे। वो अपनी भुमिका और भविष्य की राजनीति करने का रोड मैप बना चुके थे।

एक्जिट पोल एक नई शुरुआत नहीं लेकिन व्यक्ती और विचार दोनो को राजनीतिक दाव पर लगाना भविष्य की जरूरत मानी जाएगी। हर नेतृत्व को अपनी छमता और महिमा के बजाय परिणाम आधारित कामों को दूसरे की गलतियों से ज्यादा प्रथमिकता देनी पड़ेगी। बिहार का एक्जिट पोल एक अनुमान है लेकिन जब यह परिणाम बनेगा तो दो बातो पर मेरे जैसे लोगों को संबल देगा, पहला एक्जिट पोल की अवधारणा और प्रक्रिया मजबूत हो रही है दूसरा परिणाम आधारित चुनाव प्रथमिकता बनेगा।